आयुर्वेद के मुताबिक सर्दियों में नहीं खाना चाहिए दही, जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स

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गर्मियों के दिनों में हमारे पसंदीदा खाद्यों में से एक दही को सर्दियों में छोड़ पाना बड़ा मुश्किल है। बहुत से लोगों का मानना होता है कि सर्दियों में दही का सेवन नहीं करना चाहिए। यह गले में खराश आदि का कारण बनता है। दही का तासीर ठंडी होती हैष इसलिए सर्दियों में इसके सेवन से सर्दी-जुकाम होने को लेकर भी लोग आशंकित रहते हैं। दही पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य होता है। इसमें विटामिन्स, पौटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सर्दियों में दही खाने को लेकर आयुर्वेद और मेडिकल साइंस में अलग-अलग मत होते हैं। चलिए जानते है कि इस संबंध में साइंस और आयुर्वेद क्या कहते हैं।

आयुर्वेद सर्दियों में दही के सेवन से मना करता है। एक अंग्रेजी वेबसाइट फूड.एनडीटीवी.कॉम से बातचीत में आयुर्वेद एक्सपर्ट आशुतोष गौतम बताते हैं कि सर्दियों में दही खाने से शरीर में कफ का स्राव बढ़ जाता है। जो पूरे शरीर के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। गौतम का कहना है कि दही की तासीर ठंडी होती है और यह कफकार के तौर पर प्रकृति में मौजूद होता है। सर्दियों में शरीर में ज्यादा मात्रा में कफ का निर्माण उन लोगों के लिए खासी दिक्कत खड़ी कर सकता है जो पहले से ही श्वसन संक्रमण, अस्थमा, सर्दी और जुकाम से पीड़ित होते हैं।

क्या कहते हैं डॉक्टर्स

वेबसाइट को बताते हुए हेल्थ प्रैक्टीशनर शिल्पा अरोड़ा कहती हैं कि दही किण्वन की प्रक्रिया से बनती है और यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला बेहतरीन फूड है। इसमें विटामिन बी12. कैल्शियम और फास्फोरस काफी मात्रा में पाया जाता है। शिल्पा बताती हैं कि सर्दियों में शाम को 5 बजे के बाद दही नहीं खाना चाहिए। इस दौरान दही खाने से कफ बढ़ता है जो अस्थमा और एलर्जी की वह बन सकता है। बैंग्लोर की न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अंजू सूद कहती हैं कि सर्दियों में दही खाने से कोई दिक्कत नहीं होती। यह पूरी तरह से दुरुस्त होता है। इसमें विटामिन सी पाया जाता है जो सर्दी और खांसी के इलाज के लिए फायदेमंद होता है।

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