आशाराम ने किसानों के मन में जगाई नयी आशा : समन्वित कृषि मॉडल अपनाकर कमाया पांच गुना मुनाफा

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परंपरागत खेती से अपनी पैतृक छह एकड़ जमीन से प्रतिवर्ष डेढ़ लाख रूपये की आमदनी प्राप्त करने वाले कांकेर जिले के ग्राम बेवरती के किसान श्री आशाराम नेताम ने कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के मार्गदर्शन में समन्वित कृषि प्रणाली अपनाकर आज अपनी आमदनी में पांच गुना इजाफा कर लिया है। अब उन्हें समन्वित खेती से प्रति वर्ष लगभग दस लाख रूपये का मुनाफा हो रहा है। श्री आशाराम नेताम ने अपनी मेहनत और लगन से कामयाबी की नई इबारत लिखी है और अन्य किसानों के मन में आशा की नई किरण जगाई है। कृषि के क्षेत्र में श्री नेताम की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषक समृद्धि सम्मान तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषक फैलोशिप सम्मान से नवाजा गया है।

   श्री आशाराम नेताम ग्राम बेवरती के युवा किसान हैं जिन्होंने स्नातक उपाधि हांसिल करने के पश्चात अपनी पैतृक 6 एकड़ भूमि में अपने पिता के साथ हाथ बंटाना शुरू किया। वे परंपरागत खेती के रूप में धान की फसल लेने के साथ ही छोटी-मोटी डेयरी भी चलाते थे। इससे उन्हें प्रति वर्ष लगभग डेढ़ लाख रूपये की आमदनी होती थी। वर्ष 2013-14 में कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के संपर्क में आने के बाद श्री नेताम ने समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाया अब वे खरीफ में धान और रबी में अलसी और चना की फसल लेते हैं। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करते हुए उन्होंने गायों के संख्या में पांच से छह गुना बढ़ोतरी कर ली है। आज उनके पास 35 उन्नत नस्ल के पशु हैं। इनमें अधिकतर जर्सी, गीर एवं साहिवाल नस्ल के पशु हैं जिनकी दूध उत्पादन क्षमता काफी अधिक है। केवल डेयरी से ही उन्हें साल भर में 10 लाख रूपये की सकल आय होती है। उन्होंने एक एकड़ भूमि पर दो तालाबों का निर्माण किया है जिसमें वे वर्ष भर मछली बीज एवं मछली का उत्पादन कर रहे हैं। श्री नेताम को मछली पालन से लगभग सवा लाख रूपये सालाना आय हो रही है। वे गांव के अनेक लोगों को अपने खेत पर रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। श्री नेताम आज अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं।

 

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