कल्पना सरोज : 2 रुपये से 500 करोड़ तक

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हमारे समाज पर सालों से जात और धर्म का बहुत बड़ा प्रभाव रह चूका है। इस भेदभाव के कारण दलित समाज में पैदा हुए लोगो को सालो तक अन्याय और मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जाहिर है ऐसे हालातों में महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में जन्मी हुयी एक लड़की को जन्म से ही अनगिनत कठिनाइयों से झुंझना पडा। सिर्फ दलित समाज में जन्म लेने के कारण ही उसे अपने जीवन के हर मोड़ पर कई problems का सामना करना पडा।

12 साल की उम्र में उसकी शादी उससे 10 साल बड़े लड़के से हुयी। ससुराल मुंबई जैसे बड़े शहर में होने के कारन वह अपना छोटा गाव छोड़ के मुंबई आ गयी।उसका ससुराल मुंबई की एक झोपड़पट्टी में था। पर जैसा उसने सोचा था उतना सुन्दर और सुखी शादीशुदा जीवन उसके नसीब में नहीं था। ससुराल में उसके ऊपर पुरे घर का काम करने की जिम्मेदारी थी।

12 साल की उम्र में जब छोटे बच्चे खिलोनोंसे खेलते है, वह लड़की 10-12 लोगो का खाना बनाना और साथ ही कई सारे घरेलु काम करती थी। काम ठीक से न करने पर ससुराल वालों से मारपीट होती थी।

एक ऐसी लड़की जिसके सफ़र की शुरुवात ही इतने problems के साथ हुई। आज हमारे देश की most successful महिलाओ में गिनी जाती है। उस लड़की का नाम है – कल्पना सरोज!

ससुराल में अपने अत्त्याचारो से लड़ने वाली कल्पना से मिलने जब उसके पिता आये तो वह अपनी बेटी को पहेचान न पाये। उसकी हालत देख उन्होंने अपनी बेटी को वापस गाव ले जाने का decision लिया। ससुराल वालो के विरोध के बावजूद वह छोटी कल्पना को अपने साथ गाव लेके आये।

समाज ने कल्पना को उनके टूटे संसार के लिए दोषी ठहराया। यह सारी चीज़े बर्दाश्त न होकर आखिर कल्पना ने poison खाकर suicide करने की कोशिश की पर खुशकिस्मती से वो बच गयी। इस घटना के बाद उनमें बहुत change आया और उन्होंने अपना आगे का जीवन खुद के लिए कुछ कर दिखाने की ठान ली।

उन्होंने अलग अलग जगह पर job ढूंढने की कोशिश की पर education ना होने के कारण उन्हें हर जगह असफलता मिली। फिर उन्होंने मुंबई जाकर काम ढूंढने की ठान ली। अपनी माँ को मनाकर वह मुंबई आ गयी। अपने अंकल की पहचान से वह शिलाई के काम में जुट गयी। पर वहां भी confidence न होने के वजह से एक महीने तक वह helper का काम करती रही। थोडा confidence आने के बाद वह उसी company में कारागीर के तौर पर काम पे लग गयी। helper की 60 रुपये महिना की नौकरी के बाद जब वह करगिर बनी तब उन्होंने पहली बार 100 रुपयों का नोट देखा।

उसके बाद उनके छोटे भाई बहन मुंबई आ गये। मुंबई आने के बाद उनकी एक बहन की बिमारी की वजह से death हो गयी। इसका young कल्पना के ऊपर गहरा असर हुआ। पैसा न होने के कारण वह अपनी बहन को बच्चा नहीं पायी इस सोच से उन्होंने और काम करना शुरू किया। अपना खुद का business शुरू करने की idea भी उन्हें इसी दौरान मिली।

अपने घर से उन्होंने अलग अलग schemes के बारे में ढूँढना शुरू किया और loan लेके अपना business शुरू किया। beauty parlour और furniture का business शुरू करके कल्पना ने धीरे धीरे business में अपना experience बढ़ाना चालू किया।

छोटे छोटे business करने वाली कल्पना को अब real estate में जाने का मौका तब मिला जब उन्हें एक जमीन का plot बेचने के लिए एक offer आया। अलग-अलग जगह से पैसा collect करके कल्पना ने लाख रुपये जुटाए और वह plot खरीद लिया। plot खरीदने के बाद उन्हें उसके ऊपर चल रही मुसीबतों के बारे में पता चला। 3-4 सालो की मेहनत और struggle के बाद आखिर कार उन्होंने वह plot सभी सरकारी मुश्किलों से आजाद करवाया, तब उसकी कीमत कई 20 गुना से ज्यादा बढ़ गयी। उस plot पर उन्होंने अपने सिन्धी partner के साथ building बनायीं और वह से उनका real estate में सफ़र शुरू हो गया।

इतनी मुश्किलों से झुन्झने के बाद अब जाकर कल्पना जी को लोग जानने और मानने लगे। पर उनके जीवन में अभी turning point आना बाकि था – जिसका नाम था कमानी टयुब्स!

कमानी टयुब्स company उस समय काफी ख़राब हालातोंसे गुजर रही थी। ऐसे मुसीबतोंके चलते वह जल्दी ही बंद होने वाली थी। यह देख के कमानी टयुब्स में काम करने वाले कर्मचारियोंने कल्पना जी से कंपनी को संभालने का offer रखा। यह एक बहुत ही बड़ा risk से भरा decision था। Engineering कंपनी को चलाने का कोई भी experience न होने के बावजूद उन्होंने यह risk उठाई और आज “कमानी ट्यूब्स” यह एक बड़ी तेजी से बढने वाली लगभग 100 मिलियन डॉलर्स की कंपनी बन गयी हैं।

कोई भी शिक्षा या degree के बिना एक छोटे से घर से आई हुयी एक लड़की आज real estate और engineering बड़े business में नए नए मुकाम हासिल कर रही है, यह हम सब के लिए गर्व की बात है। कल्पना जी के इस काम के लिए उन्हें कई awards से नवाजा गया है। 2013 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। उन्हें business क्षेत्र में excellent काम करने के वजह से Rajiv Gandhi Award for Woman Entrepreneurs से भी सम्मानित किया गया।

अपना business start करने के लिए बैंक से loan लेने वाली कल्पना जी आज खुद Bhartiya Mahila Bank की Board of Directors की सदस्य है।कल्पना जी डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर को मानती है और वह भी उन्ही की तरह लोगो की मदद करना चाहती है। कल्पना जी ने अपने काम से लोगो को यह दिखाया की तुम चाहे किसी भी background से आये हो अगर तुम में मेहनत करने की तयारी है तो तुम कोई भी field में काम कर सकते हो और successful बन सकते हो।

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