किसानों की जिंदगी में मिठास घोलेगी स्टीविया की खेती

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स्टीविया (कुदरती शूगर फ्री फसल) शूगर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस स्वीटेस्ट गिफ्ट ऑफ नेचर के नाम से भी जाना जाता है। स्टीविया के पत्ते चीनी से करीबन 40 गुना ज्यादा मीठे होते हैं। पत्तों को पाउडर बना कर भी इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनियों द्वारा पाउडर बनाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाया जाता है। पाउडर में चीनी से करीब 400 गुना ज्यादा मिठास होती है। चाय के एक कप में 6 पत्ते डाल कर पी जा सकती है। जिससे सेहत को बिलकुल भी नुकसान नहीं होता और मिठास उतनी ही होती है। स्टीविया के पत्ते केमिकल, कॉलेस्ट्रोल व कैलोरी मुक्त होते हैं।

लुधियाना की एग्री नेचुरल कंपनी 3 रुपए प्रति पनीरी के हिसाब से देती  हैं। एक पौधा 5 साल तक चल सकता है।

साल दर साल बढ़ता है उत्पादन

हर तीन महीने बाद इसके पत्ते तोड़े जा सकते हैं यानि कि साल में 4 बार 1 एकड़ में 35 हजार के करीब पौधे लग सकते हैं। स्टीविया की फल्ड (Flood), स्प्रिंकल (Sprinkle) और ड्रिप (Drip) तरीके से सिंचाई होती है।

पहले साल 10, दूसरे 15, 3 साल बाद 22, 4 साल बाद 15 और 5वें साल 10 क्विंटल सूखे पत्ते होते हैं। यह 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकते हैं। जो लोग एग्री नेचुरल कंपनी से स्टीविया की पनीरी खरीदते हैं, कंपनी उनसे कॉन्ट्रेक्ट करके मार्किट रेट से थोड़ा कम में पत्तों को खरीद लेती है।

स्टीविया में नहीं लगती कोई बीमारी

3 रुपए के हिसाब से स्टीविया के 35 हजार पौधे 1 लाख 5 हजार रुपए के हैं। 150 रुपए किलो के हिसाब से बेचा जाए तो पहले साल में 10 क्विंटल पत्तों से डेढ़ लाख रुपए कमाए जा सकते हैं। अगले 4 साल में कुल 9 लाख 30 रुपए का मुनाफा हो सकता है। स्टीविया को कोई बीमारी नहीं लगती।

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