खुद को बनाकर स्वावलंबी, अनुभव ने लिखी नई कामयाबी

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जहाँ मिले पाँच माली वहाँ बाग सदा ख़ाली यह एक बहुत प्रसिद्ध अंग्रेजी कहावत का हिंदी रूपांतरण है और हमारे दैनिक जीवन में भी बहुत प्रासंगिक लगता है। लेकिन रायगढ़ से 14 महिलाओं का एक समर्पित समूह इससे परे कार्य करने के दिशा में सहर्ष प्रगतिशील है। अनुभव स्वयं सहायता समूह 2009 से रायगढ़ में सफलतापूर्वक मिलकर काम कर रहा है और महिलाओं की सफलता के नए मानकों को फिर से परिभाषित कर रहा है।

इंदिरा नगर स्थित अनुभव स्व सहायता समूह की स्थापना वर्ष 2009 में की गयी और सबसे पहले इन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए आंगनबाड़ी में दिए जाने वाले रेडी-टू-ईट भोजन को बनाने से किया। गुणवत्ता और सफाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने के कारण आज इस समूह की चर्चा पूरे रायगढ़ जिले में होती हैं। पर यह सब सफर इतना आसान भी नही था और यह इस समूह की सदस्य बखूबी मानती हैं। परिवार और समाज को साथ लेकर चलने के कारण इनको काफी फायदा हुआ। हर कदम पर इनको प्रशासन से सहयोग मिलता रहा फिर वह ट्रेनिंग को लेकर हो या कर्ज के लिए राशि की आवश्यकता हो। अब तक समूह ने तीन अलग अलग जरूरतों के लिए 13 लाख का ऋण लिया हैं छत्तीसगढ़ महिला कोष से और 1 लाख का अतिरिकित ऋण लिया हैं राष्ट्रीय आजीविका मिशन से। इनकी मासिक किश्त समय पर वापस कर और अब समूह खुद में इतना सक्षम हो गया हैं कि अगर किसी सदस्य को ऋण की आवश्यकता होती हैं, तो वो रकम समूह के खाते से ही दे दी जाती हैं और सदस्य उसको छोटी छोटी किश्तों में समूह को वापस करते रहते हैं।

समूह ने आपसी सहमति से समूह की अध्यक्ष और सचिव का भी चुनाव किया हैं और सभी इनके मार्गदर्शन को मानते हैं। इसका ही नतीजा हैं कि रसोई में काम करने वाली महिलाएं आज महीने में 5000 से 7000 रुपए की आमदनी कर रही हैं। इससे न सिर्फ वो आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि अपने परिवार को चलाने में एक अहम भूमिका निभा रही हैं। कुछ सदस्या ऐसी भी हैं जिनके पति ने उनका साथ छोड़ दिया है। पर अब आत्मनिर्भर बनकर वे आत्मसम्मान के साथ अपने और अपने परिवार का पोषण कर रही हैं।

रेडी-टू-ईट के साथ इन्होंने वर्ष 2009 से कैटरिंग की भी शुरुआत की और आज इस क्षेत्र में इनकी अपनी एक अलग पहचान हैं। बर्तन और टेंट की सामग्री को किरायें पे लेने के खर्च को देखते हुए इन्होंने यह सब जरूरत की चीजों को खरीद लिया हैं। अब कही भी ऑर्डर मिलने पर यह समूह ना सिर्फ स्वादिष्ट और शुद्ध भोजन बनाती हैं अपितु वहां टेंट की सामग्री भी ख़ुद से देती हैं। इसके साथ ही समूह सेनेटरी नैपकिन बना कर स्वच्छता का संदेश भी दे रही हैं और बड़ी, अचार, पापड़ बनाकर अपने व्यापार को और बढ़ा रही हैं। आज अनुभव स्व-सहायता समूह पूरे रायगढ़ के लिए एक आदर्श बनकर उभरा है और उम्मीद हैं भविष्य में यह समूह और भी बेहतर कार्य करेगा।

आज इनकी सफलता बाकी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन चुकी है और बहुत सी महिलायें इनसे जुडऩा चाहती हैं। ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग को आवेदन देकर अपने लिए रोजगार की मांग की हैं और इनका उचित निराकरण किया जा रहा हैं। इनकी रुचि को देखकर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ट्रेनिंग के माध्यम से इन्हें सक्षम बनाने की पहल जारी हैं। ट्रेनिंग के बाद नए व्यवसाय के लिए अलग अलग योजनाओं से ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा हैं ताकि किसी के भी सपनो को उड़ान भरने में कोई परेशानी न आये।

Source:DPRCG

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