घर में स्पेस नहीं था, दूसरे के आंगन में की रंगोली बनाने की प्रैक्टिस, नेशनल लेवल पर जीता मेडल

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शहर की रंगोली आर्टिस्ट स्मृता साहू ने प्रफुल्ला दहानूकर आर्ट फाउंडेशन की ओर से नेशनल लेवल पर आयोजित ऑनलाइन कलानंद आर्ट कॉम्पिटीशन में सेंट्रल जोन ब्रॉन्ज मेडल जीता है। काॅम्पिटीशन में स्मृता ने लद्दाख में पाए जाने वाले दो ऊंटों की रंगोली बनाई थी। इसे बनाने में 25 घंटे से ज्यादा समय लगा। 4 बाय 6 फीट में बनी रंगोली में स्मृता ने दोनों ऊंट के प्यार को दिखाने की कोशिश की है। स्मृता ने बताया कि ऊंट अपना प्यार जताने के लिए एक-दूसरे की गर्दन को काटते हैं। इसी लम्हे को मैंने रंगोली में उकेरा है। स्मृता ने 2017 में भी इसी कॉम्पिटीशन में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था, जिसमें उन्होंने कबूतर की रंगोली बनाई थी। इससे अलावा उन्होंने स्टेट और नेशनल लेवल पर कई अवॉर्ड जीते हैं। लेकिन स्मृता का यहां तक का सफर इतना अासान भी नहीं रहा। वो बताती हैं- जब रंगोली में करियर बनाने की शुरुआत की तो पड़ोसियों के ताने सुनने मिले। लोग कहते थे- रंगोली में कोई फ्यूचर नहीं है। किसी कोर्स की कोचिंग कर, जॉब मिलेगी तो घर का खर्चा चलेगा, रंगोली बनाने से घर नहीं चलता। लेकिन मेरी जिद थी कि मुझे इसी प्रोफेशन में आगे बढ़ना है। जो पहले मेरे फैसले का विरोध करते थे, आज वही मेरे काम की तारीफ करते नहीं थकते। परिवार में मां सीता साहू हैं, जो जनरल स्टोर चलाती हैं। तीन बहनों की शादी हाे चुकी है।

आर्टिस्ट स्मृता साहू ने नेशनल कलानंद आर्ट कॉन्टेस्ट में जीता ब्रॉन्ज मेडल

प्यार जताते ऊंट की इसी रंगोली के लिए स्मृता को मेडल मिला है।

हार्ट पेशेंट थीं मम्मी, उनकी केयर भी थी बड़ी जिम्मेदारी

स्मृता ने बताया कि जब वो कॉम्पिटीशन की तैयारी कर रही थीं, उस वक्त मां को माइनर हार्ट अटैक आ गया। इस दौरान मां की देखभाल की जिम्मेदारी और नेशनल लेवल पर खुद को साबित करने की चुनौती साथ थी, लेकिन हार नहीं मानी। घर में रंगोली बनाने की प्रैक्टिस के लिए स्पेस नहीं था, इसलिए फ्रेंड के घर जाकर रंगोली बनाने की प्रैक्टिस करती थी। इस दौरान मां को दवाइयां देना और कॉम्पिटीशन की तैयारी के लिए समय निकालना थोड़ा मुश्किल था।

 

Source:Dainik Bhaskar

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