छत्तीसगढ़ के आईएस अधिकारी रजत कुमार की प्रेरणात्मक कहानी

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रायपुर. छत्तीसगढ़ कॉडर के 2005 बैच के आईएएस रजत कुमार का जीवन यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्पद है। पढ़ाई से लेकर आईएएस बनने तक के सफर में  रजत ने तमाम कठिनाइयों का सामना किया , लेकिन बुलंद इरादे, मजबूत लक्ष्य और स्पष्ट दृष्टिकोण की बदौलत उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया । कामयाबी का यह सफर आईएएस बनने के बाद भी जारी है। उनका अब दुनिया की बेहतरीन हावर्ड यूनिवर्सिटी में  मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन  की पीजी पढ़ाई के लिए चयन हुआ है। इस कामयाबी को हासिल करने वाले वे छत्तीसगढ़  के पहले आईएएस हैं।

रजत कुमार मूल रुप से उत्तरप्रदेश के हाथरस के रहने वाले हैं, वे एक साल के थे तब उनके पिता को बिज़नस के सिलसिले में चेन्नई शिफ्ट होना पड़ा। उनके पिता के बिसनेस में  काफी उतार-चढ़ाव आते रहे है, जिसका असर रजत की पढ़ाई पर भी आया। लेकिन , पिता ने रजत और उनकी बहनों की पढ़ाई में  कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी शिक्षा चेन्नई के  सबसे अच्छे लॉयला कॉलेज में हुई । पढाई के दौरान उनके  पिता के बिसनेस में हाथ बंटाना पड़ता था। लेकिन  वे अपनी पढ़ाई को लेकर संजीदा और गंभीर रहे। कॉलेज के समय वे अच्छे डिबेटर रहे। एजुकेशन  के तत्काल बाद ही उन्होंने 2004 में  यूपीएससी की परीक्षा दी, जिसमे वे आईपीएस चयिनत हुए । लेकिन आईएएस बनने का लक्ष्य लेकर बैठे रजत ने 2005 में  फिर यूपीएससी परीक्षा दी और सफलता का परचम लहराया।

करीब 35 वर्षीय  रजत कुमार ने करीब 11 साल की सर्विस पूरी कर ली है। उनकी गिनती  तेजतरार आईएएस के साथ ही क्लियर विज़न और अच्छे योजनाकार के रुप में आती है। अपनी काबिलियत  के कारण वे मुख्यमंत्री  रमन सिंह की कोर टीम में रहे  हैं । उनके पास लोक सुराज अभियान की कमान थी  है। इस अभियान को मई 2017 में पूरा कराने के बाद बाद ही वे जून में अमरीका के लिए अध्ययन अवकाश पर चले गए और मई 2018 में उनके वापस लौटने की संभावना है ।  2005 बैच के ही आईएएस और रायपुर कलर ओपी चौधरी कहते हैं , आप अगर रजत से बात करगे तो उनके भीतर काम के प्रति जज्बा  दिखेगा । उनकी सोच रहती है की  काम को विज़न और अच्छी प्लानिंग  के साथ पूरा किया  जाए। उनकी यह कािबिलयत हमेशा से प्रभावित करती रही है। चौधरी का कहना है, निजी जीवन में  रजत अच्छे दोस्त भी हैं। वे सभी की मदद के लिए तत्पर रहते हैं ।

रजत कुमार अपनी 11 साल की सर्विस के दौरान विभिन्न पदों पर रहे। वे बीजापुर और कोरबा के कलेक्टर रहने के साथ ही डायरेक्टर  सर्व शिक्षा अभियान और डायरेक्टर  पब्लिक रेलेसन रह चुके हैं । वर्तमान में रजत मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव ,विमानन विभाग के डायरेक्टर और NRDA में  सीईओ हैं । उनके कंधों पर नया रायपुर को दुिनया की  बेहतरीन स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी है। हॉवर्ड में  सिलेक्शन के लिए 14 साल की अधिकतम सर्विस होनी चाहिए। लेकिन विभिन्न विभागों में काम कर चुके रजत अपने तजुब और लीडरशिप कौशलता की वजह से इसे महज 11 साल की सर्विस में ही यह सफलता हासिल की।

सिर्फ होता है 80 लोगों का चयन

बता दें कि हावर्ड में चयन ब्यूरोक्रेट्स के लिए बेहद प्रतिष्ठापूर्ण माना जाता है। इसका पता इस बात से चलता है कि 180 देशों में से हर साल सिर्फ 80 लोगों का सलेक्शन होता है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के लोग होते हैं। छोटे देशों के प्रधानमंत्री से लेकर नौकरशाह, कारपोरेट हाउसेज तक। पिछले साल भारत से चार लोग चुने गए थे। इनमें आईएएएस की संख्या महज एक ही थी। इस साल देश से कितने लोग चयनित हुए हैं, यह अभी साफ नहीं हो पाया है।

खर्च होते हैं एक करोड़ रुपए, फीस भरने मिलती है ढेरों स्कालरशिप

हावर्ड की सालाना फीस कम से कम 1 लाख 15 सौ 77 यूएस डॉलर यानी लगभग 67 लाख रुपए है। लगभग इतनी ही रकम अन्य संसाधनों में खर्च होती है। लेकिन हावर्ड स्कूल में एडमिशन मिलते ही आवेदक के आगे स्कालरशिप देने वालों का हुजूम लग रहता है।

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