पुसवाड़ा के चन्द्रशेखर ने आधुनिक कृषि प्रणाली से बना आत्मनिर्भर

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कांकेर: ग्राम पुसवाड़ा कांकेर से लगभग 15 किलो मीटर दूरी पर बसा एक आदिवासी बाहुल्य ग्राम हैं। वहां के मुख्य फसल धान, चना एवं सब्जी भाजी है। ग्राम के अधिकांश लोग पड़े लिखे है। क्षेत्र में कृषि के विकास की असीम सम्भावनाए हैं। सफलता में किसी का एकाधिकार नही होता यदि कुछ कर गुजरने की इच्छा शक्ति मन में हो तो सफलता अवश्य कदम चुकती हैं। ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है ग्राम पुसवाड़ा के कृषक श्री चन्द्रशेखर साहू ने । 10 वी कक्षा तक के शिक्षित श्री चन्द्रशेखर साहू की आर्थिक स्थिति 4 वर्ष पूर्व तक उतनी अच्छी नही थी। बड़ी मुश्किल से लम्बे चौड़े संयुक्त परिवार का गुजारा हो पाता था। परिवार के अधिकांश सदस्य रोजगार गारंटी का कार्य करने के जाया करते थे और आर्थिक समस्या हमेशा बनी रहती थी। कृषक के पास 6 एकड़ खेती योग्य जमीन थी लेकिन वैज्ञानिक खेती एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी नहीं होने के कारण कृषक का मन खेती से विमुख होने लगा था और परिवार कर्ज के बोझ के तले भी दबने लगा था कृषक अपनी आवश्यकता के पूर्ति के लिए पशु-पालन भी करता था। इसके घर में 3 भैंस व 2 गाय भी है।

कृषक ने किसान समृद्धि योजनांतर्गत नलकूप खनन करवाया जिसमें उसे कषि विभाग की ओर से 35000 रूप्ये का अनुदान प्राप्त हुआ तथा 70 प्रतिषत अनुदान सुक्ष्म सिंचाई योजनांतर्गत स्प्रिंकलर पाईप लिया। जब उन्हें पता चला कि कृषि विभाग द्वारा पक्के वर्मी टांका के निर्माण के लिए 12 हजार रूपये अनुदान भी दिया जाता है। तो उन्होने तुरन्त क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर 10ग3ग2 फिट आकार के पक्के वर्मी टांका का निर्माण कराया और वैज्ञानिक विधि अनुसार कृषि विभाग के अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन में अपने घर के साग-सब्जीयो के टुकड़े, गोबर, पेरोसी आदि से भरकर टांका को पेक किया और 2 किलो प्रति टंकी की हिसाब से केचुआ डाला 3 महीने मे ही इनकी मेहनत रग लाई फिर तो कृषक ने पिछे मुड़कर नही देखा और आज कृषक अपने सम्पूर्ण 6 एकड़ फसल में रासायनिक खाद के साथ वर्मी कम्पोस्ट खाद का भी प्रयोग कर रहा हैं। कृषक ने पिछले वर्ष 2 एकड़ रकबा में ड्रीप से टमाटर और केला की फसल लगाई हैं जिससे उसे लगभग 1 लाख 80 हजार रूपये की आमदनी हुई । टमाटर एवं तरबूज की फसल से भी किसान को 1 लाख 50 हजार  रूपये की आमदनी हुई है।
जागरूकता और सच्ची लगन से कोई भी कार्य किया जाय तो सफलता अवश्य मिलती है। कृषक ने यह सिद्ध कर दिखाया हैं कि जैविक खाद के उपयोग से भी कृषि के क्षेत्र में क्रांति कारी बदलाव की असीम सम्भावना हैं।कृषक के शब्दो में मैं हमेशा कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों से सम्पर्क बनाये रखता हॅू इससे मुझे हमेशा नई-नई जानकारियां मिलती हैं। मैं अन्य सभी कृषक भाईयो को सलाह देता हॅू। कि कृषि विभाग की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेकर अपने जीवन को खुशहाल बनाये।

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