स्वच्छता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली छत्तीसगढ़ की कुंवर बाई

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स्वच्छता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली छत्तीसगढ़ की कुंवर बाई देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणास्रोत हैं. विश्व महिला दिवस के अवसर पर पीएम मोदी ने कुंवर बाई के पैर छूने वाला वीडियो ट्वीट किया है. पीएम ने ट्वीट में कुंवर बाई को प्रेरणास्रोत बताया है. उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बकरी बेचकर शौचालय बनवाने के लिए कुंवर बाई का सम्मान किया था.

विश्व महिला दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी ट्वीट के जरिए कुंवर बाई को श्रद्धांजलि दी. बता दें कि मुख्यमत्री ने अपने ट्वीट में कुंवर बाई को धन्यवाद देते हुए लिखा कि आप हमेशा दिलों में जिंदा रहोगे. साथ ही यह भी लिखा कि आपके बताए गए मार्ग पर हम सब को चलना चाहिए.

बता दें कि यह वही कुवंर बाई हैं, जिन्होंने टॉयलेट निर्माण के लिए अपनी बकरी तक बेच दी थी. धमतरी जिला निवासी कुंवर बाई का 106 साल की उम्र में बीते महीने निधन हो गया था. महिला दिवस के मौके पर पीएम मोदी के अलावा उनके कार्यालय और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी कुंवर बाई को नमन किया.

बता दें कि कुंवर बाई को सिर्फ शौचालय निर्माण ही नहीं, ​​बल्कि उनके संघर्षों के लिए भी जाना जाएगा.

बता दें कि छत्तीसगढ़ की स्वच्छता दूत पद्मश्री कुंवर बाई ने लंबी बिमारी के बाद बीते 23 फरवरी को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में अंतिम सांसे लीं. निधन से कुछ घंटे पहले ही 106 वर्षीय कुंवर बाई से प्रदेश के मुख्यंमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वीडियो कॉल से कुंवर बाई से बात करने की कोशिश की थी. ये कुंवर बाई की अंतिम इच्छाओं में से एक था.

सीएम डॉ. रमन ने कहा था कि कुंवर बाई हमेशा स्वच्छता मिशन के लिये एक मिसाल के तौर पर याद की जाएंगी. क्योंकि शौचालय बनाने के लिये उन्होंने अपनी अंतिम पूंजी यानी कि पाली हुई बकरियों को बेच दिया था. 100 साल की उम्र में उन्‍होंने शौचालय बनवाया था.

देश के प्रधानमंत्री ने अपने शपथ ग्रहण में ये ऐलान किया था कि वो देश में शौचालय बनवाएंगे. बस इसके बाद से ही देश के सभी जिलो में स्वच्छता का सरकारी अभियान छिड़ गया था. उद्देश्य यही कि महिलाओं को नित्य क्रिया के कारण लज्जा न उठानी पड़े. स्वच्छता की आदत बने. इसके लिये शहर और गांव में भरपूर प्रचार प्रसार किया गया.

गौरतलब है कि धमतरी में लगभग 40 साल पहले बने गंगरेल बाध में 52 गांव डूब गए. उन्हीं में से एक था कुवरबाई का गांव. इसके बाद वो अपने परिवार से साथ बांध के किनारे आकर बस गईं. कुंवर बाई की 12 संतानें थीं, लेकिन उनमें से सर्फ चार बेटीया ही बची हैं.

कोटाभर्री में कुवरबाई ने कच्चा मकान बना लिया और बकरियां पाल कर अपना गुजर बसर करने लगीं. हालांकि बाद में सरकार की तरफ से उन्हें 600 रुपए वृद्धावस्था पेंशन के तौर पर ​मिलने लगे. कुवर बाई ने अपने जीवन के लगभग 100 साल खुले में शौच कर के गुजारे. एक सदी पुरानी आदत को बदलने के लिये कुंवर बाई ने शायद एक सेकंड में ही निर्णय ले लिया. न सर्फ निर्णय बल्कि पूरे गांव को ओडीएफ करवा दिया.

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