छत्तीसगढ़ और करील के साग

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छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बास्ता यानी करील जनजाति समुदाय द्वारा सामयिक खाद्य पदार्थ के रूप में इस्तेमाल की जाती है. करील बांस के पेड़ों की कोमल कोपलें होती हैं, जिन्हें सब्जी के रूप में खाने में इस्तेमाल किया जाता है। जून से अगस्त तक बांस के झुरमुटो में नयी कोपलों (बास्ता) को निकाला जाता है। जिसे बाजार में बेचा जाता है।

बनाते हैं मिक्स अचार

बताया गया कि बस्तर से मंगवाए गए बास्ता का उपयोग मिक्स अचार बनाने और औषधीय सब्जी के रूप में बेचा जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि मैदानी इलाके में लोग इसे पेट की कृमि नष्ट करने, पथरी खत्म करने आदि से बचने खा रहे हैं। ज्ञात हो कि बास्ता तोड़कर बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित है, फिर भी तस्कर इसकी निकासी में ग्रामीणें को लिप्त कर अपना उद्देश्य पूरा कर रहे हैं

औषधीय है बास्ता

बास्ता में सायनोजेनिक ग्लूकोसाइड, टैक्सीफायलिन,तबशीर के अलावा बेन्जोइक अम्ल पाया जाता है । जो कफ निःसारक,उत्तेजक,बल्य,बाजीकारक, उद्वेष्टननिरोधी,तृषाशामक होता है, इसलिए लोग इसका उपयोग करते हैं। बास्ता के उपरोक्त औषधीय गुणों को देखते हुए ही बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी लंबे समय से हो रही है।

करील की खपत गांवों के साथ-साथ अपने शहरों पर बड़े पैमाने पर हो रही है. इसके चलते इसका बड़े पैमाने पर दोहन कर व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है. कोपलें तोड़ लिए जाने से बांस को नुकसान पहुंचता है. करील (बांस की कोंपल) पूर्व में करील स्थानीय जनजातीय निवासियों के लिए सामयिक खाद्य पदार्थ के रूप में उपलब्ध था, जिसे स्थानीय जनजातीय समूह इसका दोहन इस प्रकार करते थे कि बांस वनों को नुकसान न पहुंचे.शहरों में करील की बढ़ती मांग ने इसके दोहन का व्यवसायीकरण कर दिया है, जिससे बांस वन को नुकसान पहुंचाने की सीमा तक व्यवसायिक दोहन होने लगा है. इस कारण बांस वन विलुप्त होने लगे हैं और बांस आधारित उत्पादों से जीवनयापन करने वाले वनवासियों के लिए रोजगार के अवसर भी छिन रहे है.

हमरगोथ भी आप सभी से आग्रह करता है की करील का अपने क्षेत्र से बाहर निकासी न होने दें और मात्र अपने स्वयं के उपयोग के लिए परम्परागत रूप से बिना बांस भिरों को नुकसान पहुंचाए करील का कम से कम उपयोग करें.

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