2018 में छत्तीसगढ़ को मिला अनाज की पैदावार में देश में अव्वल राज्य का पुरस्कार

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छत्तीसगढ़ में कृषि की अपार संभावनाएं हैं। यही कारण है कि दूसरे देश भी कृषि की तरफ टकटकी लगाए छत्तीसगढ़ को देख रहे हैं। निश्चित ही इसमें सरकार की पालिसी का बहुत बड़ा रोल है। यदि सरकार ने बेहतर नीति न अपनाई होती तो शायद आज यह दिन देखने को न मिलता। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों को लेकर बड़े और मिसाल देने वाले काम हुए हैं। 2018 में छत्तीसगढ़ को देश में अनाज पैदावार में सबसे अव्वल राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार पिछली अधिकतम पैदावार के मुकाबले 28.68 प्रतिशत बढ़ोतरी के लिए मिला। छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने इस पुरस्कार से सम्मानित किया था। वास्तव में यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ के कर्म का सम्मान था। धान की बेहतर और उच्च गुणवत्ता की किस्मों की खेती पर जोर देने, मक्के की बेहतर उपज और राज्य में सिंचाई संसाधनों के त्वरित विकास से छत्तीसगढ़ को यह सफलता हासिल हुई है। राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ में अनाज का उत्पादन दोगुना और उत्पादकता ढाई गुना तक बढ़ गई है।

जहां तक छत्तीसगढ़ की उत्पादकता की बात है, तो जो प्रकृति ने राज्य को संसाधन दिए हैं, चाहे वह पर्वत हों या पठारी क्षेत्र, वहां प्रचूर मात्रा में कृषि योग्य तत्व दिए हैं और सरकार ने उन कमियों को पूरा किया है, जो क्षेत्रों में नहीं है, जैसे बिजली। राज्य ने प्राकृतिक संसाधनों से मानव संसाधन को जोड़कर कृषि को उच्चतम शिखर पर ले जाने का प्रयास किया है। मध्यभारत में कृषि की जो संभावनाएं आज छत्तीसगढ़ में दिखाई देती हैं, वह किसी अन्य राज्य में नहीं। यहां पर्वतीय क्षेत्रों में अलग कृषि हो सकती है और पठारी क्षेत्रों में अलग। साल भर खेती ली जा सकती है। सरकार को किसानों के लिए खुले बाजार की व्यवस्था में थोड़ा और काम करना चाहिए, जिससे उनकी आय में बड़ा इजाफा हो सकता है। हालांकि अच्छी नीतियों के कारण ही पुरस्कार भी मिले हैं।

(डॉ. तुषार पाणिग्रही भारतीय बीज बाजार के विश्लेषक और कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर इंदौर के पूर्व छात्र हैं)

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