पिता के साथ जेल में थी नन्‍हीं बेटी, अब स्कूल के हॉस्टल में संवरेगा भविष्य

0
177
Khusi-Bilaspur

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहे पिता के साथ बिना गुनाह कैदियों की तरह रह रही खुशी अब स्कूल के हॉस्टल में रह कर अपना भविष्य संवारेगी। पिता अपनी पत्‍नी की हत्‍या के जुर्म में जेल में बंद हैै।

एक माह पहले जेल के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डॉ. संजय अलंग की नजर महिला कैदियों के साथ बैठी खुशी पर पड़ी। बेगुनाही की सजा काट रही नन्हीं सी खुशी (बदला हुआ नाम) की आंखों में उसके बचपन की बेबसी देख उन्होंने उससे वादा किया कि उसका दाखिला किसी बड़े स्कूल में कराएंगे। कलेक्टर ने सोमवार को उसे अपनी कार से जेल से स्कूल लेकर गए। खुशी अब जेल में नहीं बल्कि स्कूल के हॉस्टल में रहेगी। साथ ही वहां पढ़ाई करते हुए अपना भविष्य गढ़ेगी।

दरअसल खुशी के पिता केंद्रीय जेल बिलासपुर में सजायाफ्ता कैदी है। पांच साल की सजा काट ली है, पांच साल और जेल में रहना है। खुशी जब 15 दिन की थी तभी उसकी मां की मौत पीलिया से हो गई थी। पालन-पोषण के लिए घर में कोई नहीं था। इसलिए उसे जेल में ही पिता के पास रहना पड़ रहा था। थोड़ी बड़ी हुई तो उसकी परवरिश का जिम्मा महिला कैदियों का सौंपा गया। वह जेल में संचालित प्ले स्कूल में पढ़ रही थी।

बावजूद इसके जेल की आबोहवा से आजाद होना चाहती थी। कलेक्टर डॉ.अलंग ने निरीक्षण के दौरान खुशी से बात की तो उसने कहा कि वह जेल से बाहर आना चाहती है। उसका मन किसी बड़े स्कूल में पढ़ने का है। उसकी बात ने कलेक्टर को भावुक कर दिया। उन्होंने तत्काल शहर के स्कूल संचालकों से बात की और जैन इंटरनेशनल स्कूल के संचालक खुशी को प्रवेश देने के लिए तैयार हो गए। सोमवार को जब कलेक्टर उसे लेकर स्कूल पहुंचे तो वह कार से उतरकर एकटक स्कूल को देखती रही। खुशी कलेक्टर की अंगुली पकड़कर स्कूल के अंदर तक गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here