एशिया पैरा आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में श्रीमंत 14 देशों के खिलाड़ियों को हराकर गोल्ड मेडल

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shrimant jha

किर्गिस्तान में हुए एशिया पैरा आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में श्रीमंत 14 देशों के खिलाड़ियों को हराकर गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहे। खास बातचीत में उन्होंने बताया- जन्म से मेरा दायां हाथ कमजोर है। दाएं हाथ में सिर्फ अंगूठा है। उंगलियां नहीं हैं। बाएं हाथ में दो उंगली और अंगूठा है। मेरी ये कमजोरी लोगों के लिए हंसने की वजह थी। पहले जो लोग पहले मुझ पर हंसते थे, आज वो मेरी तारीफ करते नहीं थकते। बचपन में फुटबॉल में इंट्रेस्ट रखने वाले श्रीमंत डिस्ट्रिक्ट और स्टेट लेवल खेल चुके हैं। जब नेशनल टीम का सलेक्शन चल रहा था तब डिसेबिलिटी के कारण मुझे बाहर कर दिया गया, तब बहुत निराशा हुई। फिर सीनियर्स ने आर्म रेसलिंग यानी पंजा कुश्ती में करियर बनाने की सलाह दी। ये खेल मेरे लिए नया था। शून्य से शुरुआत की और धीरे-धीरे इसमें दिलचस्पी बढ़ती गई। परफेक्शन लाने ट्रेनिंग ली और जिम जॉइन किया। श्रीमंत इंटरनेशनल टूर्नामेंट में अब तक 11 मेडल अपने नाम कर चुके हैं। उनका सपना ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।

दूसरों के लिए हंसने की वजह थी श्रीमंत की कमजोरी अब पैरा आर्म रेसलिंग में हैं एशिया के नंबर-1 खिलाड़ी 

साथ खड़ा होने में कतराते थे क्लासमेट 

श्रीमंत ने बताया, स्कूल में प्रेयर के समय जब मैं सबसे आगे खड़ा होता था, तो क्लासमेट मुझे सबसे पीछे भेज देते थे। कहते थे- हाथ तो ठीक से काम नहीं करता, आगे खड़ा हो गया है…। इतना ही नहीं स्कूल में मेरे साथ रहने में भी क्लासमेट कतराते थे। वे कभी मुझे अपने ग्रुप में शामिल नहीं करते थे। मेरी शारीरिक कमजोरी दूसरों के लिए हंसी का कारण बन गई थी। इंजीनियरिंग करने के बाद जहां भी जॉब के लिए अप्लाई करता, मुझे रिजेक्ट कर दिया जाता। दुख होता था लेकिन मन में सोच रखा था कि एक दिन कुछ ऐसा करूंगा कि लोग दूसरों को गर्व से कहेंगे कि श्रीमंत हमारा दोस्त है। वर्तमान में श्रीमंत निजी कंपनी में इंजीनियर हैं। 


खर्च निकालने जिम में की ट्रेनर की नौकरी 

श्रीमंत ने बताया, पंजा कुश्ती के लिए अच्छी डाइट और फिटनेस जरूरी है। परिवार की हालत ठीक नहीं थी। पैरेंट्स इतना खर्च उठाने में सक्षम नहीं थे। इसलिए एक जिम में बतौर ट्रेनर जॉब की। ट्रेनिंग देने रोज सुबह-शाम 7 किमी साइकिल से जिम जाता था। सैलरी का आधा हिस्सा डाइट पर खर्च करता। आधा फैमिली को देता था।

 

85 किलो कैटेगिरी में जीता गोल्ड 

एशिया पैरा आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में 72 किलो के श्रीमंत झा ने 85 किलोग्राम कैटेगिरी में कजाकिस्तान के खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने बताया कि पंजा कुश्ती शुरू करने के दौरान कई चैलेंजेस आए। तब सीनियर खिलाड़ियों ने मेरी बहुत हेल्प की। उन्होंने जिमिंग में भी हेल्प की। डंबल उठाकर देना, वर्कआउट कैसे करते हैं, पुशअप कैसे मारते हैं जैसी बातें सीनियर खिलाड़ियों ने सिखाईं। श्रीमंत के पिता सदाशिव झा और मम्मी मनोरमा झा हैं।

 

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